वो लड़की
वह एक लड़की थी,
जो कम उम्र में बड़ी हो गई।
जो कुछ ही साल में सयानी हो गयी,
वो एक लड़की थी,जो कल छोटी और आज बड़ी हो गयी।
माँ की जगह ले, उसने घर को सम्भाल लिया,
पिता के ना होते, उसने जिम्मेदारियों को सम्भाल लिया।
कल वह छोटी सी लड़की हुआ करती थी,
जिसे आज जिम्मेदारियों ने बड़ा बना दिया।
दुनिया उस गति से आगे बढ़ गई,
पर वो वहीं थम सी गई।
सब आगे बड़ चले एक तेजी के साथ,
वह वहीं थम गई एक मायुसी के साथ।
उन ठंडी हवाओं में,
अपनी खुशिया समेटे।
और मायुसी की एक चादर लपेटे,
आगे की ओर अब चल दी वो।
अब वो मासुम सा चहरा,दब सा गया है,
अब वो बचपना कहीं, छिप सा गया है।
उसने इस अघेरे मे उजाला जला लिया है,
अपनी उम्र का लिहाज ना कर,अपना वचपना छिपा लिया।
- प्राची रतुडी
Superb ♥️
ReplyDeleteWonderful ❤
ReplyDeleteThanku 🙂
DeleteWonderful 😍😍😍😍
ReplyDeleteThankx 🙂
DeleteVery nice keep it up
ReplyDeleteThanku 🙂
DeleteSuperb ♥️ ♥️
ReplyDeleteThanku 🙂
DeleteSuperb
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DeleteKeep going..!!
ReplyDeleteWow kya likha ha lajawab❤️
ReplyDeleteThanku 😊
DeleteBeautiful start ...keep going
ReplyDeleteThanku 😊
DeleteEvery lines 😍🔥👌
ReplyDeleteThanku 😊
DeleteLines ❤️❤️❤️❤️💯
ReplyDeleteIts amazing👏👏👏 keep it up
ReplyDeleteThanku 😊
DeleteIts amazing 👏 👏👏 keep it up
ReplyDeleteWell done prachi. Keep it up😘😇
ReplyDeleteThanku 😊😊
DeleteWow its fabulous...keep it up..
ReplyDeleteThanku so much 😊
Deleteप्रस्तुत पंक्ति में कवियत्री प्राची अपनी कविता के माध्यम से लड़कियों के जीवन वृन्त की चर्चा कर रही है.
ReplyDeleteMai ek ese ladki ke bare mai batana chahte hu jiska koi nahi hai or vo akele hai is duniya mai .....😊
DeleteYe tum ne likha hai??
ReplyDeleteJi ha ye mene he likhi hai 🙂
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