वो लड़की


वह एक लड़की थी, 
 जो कम उम्र में बड़ी हो गई।
जो कुछ ही साल में सयानी हो गयी,
वो एक लड़की थी,जो कल छोटी और आज बड़ी हो गयी।

माँ की जगह ले, उसने घर को सम्भाल लिया,
पिता के ना होते, उसने जिम्मेदारियों को सम्भाल लिया।
कल वह छोटी सी लड़की हुआ करती थी,
जिसे आज जिम्मेदारियों ने बड़ा बना दिया। 

दुनिया उस गति से आगे बढ़ गई,
पर वो वहीं थम सी गई।
सब आगे बड़ चले एक तेजी के साथ,
वह वहीं थम गई एक मायुसी के साथ।

उन ठंडी हवाओं में,
अपनी खुशिया समेटे।
और मायुसी की एक चादर लपेटे,
आगे की ओर अब चल दी वो।

अब वो मासुम सा चहरा,दब सा गया है,
अब वो बचपना कहीं, छिप सा गया है।
उसने इस अघेरे मे उजाला जला लिया है,
अपनी उम्र का लिहाज ना कर,अपना वचपना छिपा लिया।

                                                              - प्राची रतुडी






Comments

  1. Wonderful 😍😍😍😍

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  2. Beautiful start ...keep going

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  3. Its amazing👏👏👏 keep it up

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  4. Its amazing 👏 👏👏 keep it up

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  5. Well done prachi. Keep it up😘😇

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  6. Wow its fabulous...keep it up..

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  7. प्रस्तुत पंक्ति में कवियत्री प्राची अपनी कविता के माध्यम से लड़कियों के जीवन वृन्त की चर्चा कर रही है.

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    1. Mai ek ese ladki ke bare mai batana chahte hu jiska koi nahi hai or vo akele hai is duniya mai .....😊

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